अब झारखंड में कांग्रेस का एजेंडा तय करेंगे आरपीएन – KhabarTak

अब झारखंड में कांग्रेस का एजेंडा तय करेंगे आरपीएन

रांची। दिग्विजय सिंह के बाद वीके हरिप्रसाद पर गाज गिर गई। अब यूपी के युवा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह को झारखंड का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ दो सचिवों उमंग सिंघर और मोइन-उल-हक की भी नियुक्ति की गई, जो आरपीएन का सहयोग करेंगे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में पीएल पुनिया को प्रभार दिया गया है। उनके सहयोगी के तौर पर कमलेश्वर पटेल और अरूण उरांव को सचिव पद पर नियुक्त किया गया है, यानी राहुल गांधी एक-एक कर पुरानी टीम का पत्ता साफ करने में जुट गए हैं। अपनी नई टीम का गठन प्रारंभ कर दिया है। पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास के तहत इन बदलावों को देखा जा सकता है। आपको बता दें कि वीके हरिप्रसाद के खिलाफ झारखंड से शिकायतों का अंबार खड़ा हो गया था। झारखंड में उनकी कार्यशैली पर लगातार अंगुलियां उठ रही थी। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा भी वीके की कार्यशैली से खासा नाराज चल रहे थे। वीके छत्तीसगढ़ कोटे से राज्यसभा में जाना चाहते थे। उनकी राह के सबसे बड़े रोड़ा अजित जोगी और मोहसिना किदवई थीं। जोगी से आमने-सामने की लड़ाई में अहमद पटेल की ताकत के बल पर वीके को उनको कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाने में सफलता मिली। झारखंड के कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि वीके हरिप्रसाद के प्रभारी रहते पार्टी पिछलग्गू बनकर उभरी। प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत की सेवाओं का भरपूर लाभ उन्होंने लिया, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को धकियाते रहे। राज्य में कांग्रेस के 6 विधायक हैं। इनमें पूर्व सीएलपी लीडर और बढ़ई से विधायक मनोज यादव की अगुवाई में 6 में से 5 विधायक समानांतर कांग्रेस चला रहे थे। इन विधायकों नेे प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली और प्रभारी वीके द्वारा पार्टी के हितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया था। प्रदेश अध्यक्ष द्वारा पूर्व प्रवक्ता अजय राय और ददई दुबे का पार्टी से निष्कासन का मामला भी वीके हरिप्रसाद की छुट्टी का प्रमुख कारण बना। अजय राय ने पांचों विधायकों, पूर्व विधायकों और सांसदों के साथ मिलकर केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अभियान भी छेड़ा हुआ था। पिछले दिनों झारखंड का विधायक मंडल युवा विधायक इरफान अंसारी की अगुवाई में कांग्रेस उपाध्यक्ष से मिला था और वहां की स्थिति की जानकारी दी थी। इरफान के साथ राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचु ने भी सुखदेव भगत की अनुभवहीनता और प्रदेश कार्यालय को बीडीओ आफिस की तर्ज पर चलाने का आरोप लगाया था। साथ ही अजय राय और ददई दुबे के बारे में कांग्रेस उपाध्यक्ष को विस्तृत जानकारी दी। इस टीम की भावना सुनते ही राहुल भी भावुक हो उठे थे। 

उन्होंने बिना किसी जवाबतलवी किए बगैर ही इन दोनों नेताओं का निष्कासन रद किया। जिसकी सूचना प्रदेश अध्यक्ष को मीडिया के माध्यम से मिली। आरपीएन सिंह पहले भी सचिव के तौर पर झारखंड के प्रभारी रह चुके हैं। वे प्रदेश के सभी जिलों के नेताओं को निजी तौर पर जानते हैं और प्रखंड स्तर तक का दौरा कर चुके हैं। इन बीते महीनों में भी कांग्रेस उपाध्यक्ष झारखंड मसले पर आरपीएन से फीडबैक लेते रहे हैं। उसी का परिणाम है कि झारखंड में उन्हें एकबार फिर पूरी तरह से कमान दी गई है। अजय राय समेत प्रदेश के कई कांग्रेसी नेताओं ने इस मामले पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा है कि आरपीएन सिंह के आने से प्रदेश में नई उर्जा का संचार होगा और संगठन और मजबूत बनकर उभरेगा।

Via nayaindia.com

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