भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी दिल्ली के एम्स में भर्ती

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New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को बुधवार देर रात दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया. सूत्रों ने यह जानकारी दी.एक सूत्र ने बताया, ‘‘उनकी हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है.”

लाल कृष्ण आडवाणी की गिनती बीजेपी के दिग्गज नेताओं में की जाती है. उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुआ था. उनके पिता का नाम डी अडवाणी और मां का नाम ज्ञानी आडवाणी था. 25 फरवरी 1965 को उन्होंने कमला आडवाणी से शादी की. उनके दो बच्चे हैं, बेटी का नाम प्रतिभा आडवाणी है. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा कराची के सेंट प्रैट्रिस स्कूल से पूरी की. विभाजन के बाद भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ की डिग्री ली.

देश प्रेम के जज्बे के चलते उनका झुकाव आरएसएस की तरफ बढ़ने लगा. साल 1947 में जब देश आजाद हुआ तो लाल कृष्ण आड़वाणी पाकिस्तान में होने की वजह से इस आजादी का जश्न नहीं मना सके और उनको मजबूर अपना घर छोड़ना पड़ा.  देश के विभाजन के बाद वह कराची से दिल्ली आ गए और राजस्थान में संघ के लिए प्रचार करने लगे. उन्होंने लंबे समय तक संघ प्रचारक के तौर पर काम किया. 1947 से 1951 तक उन्होंने कराची शाखा के आरएसएस सचिव के रूप में भरतपुर, अलवर, बूंदी, कोटा और झालावाड़ में संघ के कार्यक्रमों का आयोजन किया.

बात अगर लाल कृष्ण आडवणी के राजनीतिक सफर की करें तो साल 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जब जनसंघ की स्थापना की, तब से साल 1957 तक आडवाणी पार्टी सचिव रहे. फिर 1973 से 1977 तक उन्होंने जनसंघ में अध्यक्ष पद पर सेवाएं दीं. साल 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई तब वह इसके संस्थापक सदस्य थे. आडवाणी ने 1980 से 1986 तक बीजेपी के महासचिव रहे. 1986 से 1991 तक वह बीजेपी अध्यक्ष रहे. आडवाणी तीन बार बीजेपी के अध्यक्ष रहे. वह 5 बार लोकसभा सांसद और 4 बार राज्यसभा सांसद रहे. साल 1977 से 1979 तक वह पहली बार केंद्र में मंत्री बने. उन्होंने इस दौरान सूचना प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार संभाला.

लाल कृष्ण आडवाणी ही वह नेता हैं, जिन्होंने राजनीति में ‘यात्राओं’ का कल्चर शुरू किया था. जिस समय अयोध्या में राम मंदिर की मांग अपने पीक पर थी, तब लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथयात्रा शुरू की थी,  जिसकी वजह से देश की राजनीति में हिंदुत्व की राजनीति ने उभरना शुरू किया. हालांकि बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उनको समस्तीपुर में गिरफ्तार करा दिया था. इस घटना के बाद लकृष्ण आडवाणी राजनीति के हीरो बनकर उभरे.

 

 

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