18वीं लोकसभा के पहले सत्र की बैठक शुरू, पीएम मोदी ने ली सांसद पद की शपथ 

New Delhi: पीएम मोदी ने 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ले ली हैं. इसी के साथ 18वीं लोकसभा के पहले सत्र की पहली बैठक शुरू हो चुकी है. वहीं बाकी सासंदों के शपथ लेने का सिलसिला जारी है. प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने सदन की कार्यवाही शुरू कराई. पीएम मोदी हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव के बाद लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटे हैं. मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद ने नौ जून को शपथ ली थी. पीएम मोदी तीसरी बार वाराणसी लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए हैं. कार्यवाही शुरू होते ही सदन के नेता होने के नाते मोदी ने सबसे पहले शपथ ली.

महताब ने राष्ट्रपति भवन में सदन के सदस्य और प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली थी. इससे पहले पीएम मोदी का संबोधन हुआ. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ये वैभव का दिन है. साथ ही पीएम मोदी ने नए सांसदों का स्वागत भी किया और कहा कि देश चलाने के लिए सहमति जरूरी है. 18वीं लोकसभा के पहले सत्र से पहले पीएम मोदी का संबोधन हुआ. इस संबोधन ने नई सरकार और विपक्ष की भूमिका पर बात की. इसके बाद पीएम मोदी सदन में पहुंचे, जहां उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान नजर आई. आज से शुरू हुआ संसद का सत्र 3 जुलाई तक चलेगा.

पीएम मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले के अपने संबोधन में कहा कि देश की जनता विपक्ष से संसद की गरिमा बनाए रखने की उम्मीद करती है ना कि ‘नखरे, ड्रामा, नारेबाजी और व्यवधान’ की. उन्होंने कहा कि देश को एक अच्छे और जिम्मेदार विपक्ष की आवश्यकता है. 18वीं लोकसभा के पहले सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने सभी नवनिर्वाचित सांसदों से इस सत्र का उपयोग जनहित में करने का आह्वान भी किया. उन्होंने कहा, ‘‘सभी सांसदों से देश को बहुत अपेक्षाएं हैं. मैं सभी सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे जनहित के लिए इस अवसर का उपयोग करें और जनहित में हर संभव कदम उठाएं.”

पीएम मोदी ने कहा कि देश की जनता विपक्ष से अच्छे कदमों की अपेक्षा रखती है. अब तक जो निराशा मिली है… इस 18वीं लोकसभा में देश का सामान्य नागरिक विपक्ष से अपेक्षा करता है कि वह जिम्मेवार विपक्ष के नाते अपनी भूमिका का निर्वाह करे, लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने की देश उनसे अपेक्षा करता है… मैं आशा करता हूं कि विपक्ष उसमें खरा उतरेगा.” प्रधानमंत्री ने कहा कि आम जन अपेक्षा करता है कि सदन में बहस हो. लोगों को यह अपेक्षा नहीं है कि नखरे होते रहे, ड्रामा होते रहे, व्यवधान होता रहे… लोग ठोस काम चाहते हैं, नारेबाजी नहीं चाहते.

 

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