ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग एप और वेबसाइट यूट्यूब ने बड़ा एलान किया है। यूट्यूब ने अब अपने इनबॉक्स में किसी कंटेंट के लिए सरकार की तरफ से की गई फंडिंग के बारे में भी जानकारी देगा। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यूट्यूब का यह एलान काफी अहम माना जा रहा है।  
समाचार आधारित वीडियो के लिए ‘इन्फॉर्मेशन पैनल’ शुरू करने के बाद यूट्यूब ने सोमवार को एलान किया कि इनबॉक्स में अब यह भी दर्शाया जाएगा कि क्या किसी कंटेट या सामग्री के लिए फंडिंग सरकार की ओर से किया गया है। यूट्यूब ने अपने प्लेटफॉर्म पर किसी तरह की भ्रामक सूचना को रोकने के लिए यह जरूरी कदम उठाया है। यूट्यूब ने मार्च में इन्फॉर्मेशन पैनल दिखाने की घोषणा की थी।
 
यूट्यूब के निदेशक (समाचार भागीदारी प्रमुख) टिम काट्ज ने अपने ब्लॉगपोस्ट में कह कि हमारा मकसद यूजर्स को अतिरिक्त सूचना प्रदान करना है, जिससे वे जो कुछ यूट्यूब पर देखने जा रहे हैं उस समाचार के स्रोत के बारे में जानकारी पा सकें। उन्होंने बताया कि ये अतिरिक्त सूचना पैनल अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध होंगे।
 
काट्ज ने समझाते हुए कहा कि यदि किसी चैनल का स्वामित्व यदि ऐसे समाचार प्रकाशक के पास है, जिसकी फंडिंग सरकार ने की है, तो इन्फॉर्मेशन पैनल बताएगा कि इसके लिए पूरी या आंशिक फंडिंग सरकार से की है या यह सार्वजनिक प्रसारण सेवा है। साथ ही, सरकारी फंडिंग वाले प्रकाशक का लिंक भी विकिपीडिया पेज पर दिया जाएगा। गौरतलब है कि यूट्यूब पहले से ‘ब्रेकिंग न्यूज’ और ‘टॉप न्यूज’ जैसे फीचर्स उपलब्ध करा रही है।
 

इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि गगूल, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म पर फरवरी से अप्रैल तक 3.76 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इनमें गूगल और उसके अन्य प्लेटफॉर्म पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी राजनीतिक विज्ञापन देने के मामले में भाजपा से भी आगे है। टीडीपी ने विज्ञापन पर 1.48 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि भाजपा ने 1.21 करोड़ रु. के विज्ञापन जारी किए। वहीं, गूगल का कहना था कि हमारा उद्देश्य राजनीतिक विज्ञापनों पर किए गए खर्च को लेकर पूरी पारदर्शिता बरतना है।