प्रोसेस्ड फूड वह खाद्य पदार्थ होता है जिसे सुरक्षित रखने या सुविधा के लिए उसके स्वरूप को बदल दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खाद्य पदार्थ सेहत के लिए उपयोगी नहीं होते क्योंकि इनमें चीनी, नमक या वसा की मात्रा अधिक होती है। स्नैक्स, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, ब्रेड, रेडी टू ईट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स प्रोसेस्ड फूड के उदाहरण हैं। जानते हैं इस प्रकार के खाद्य पदार्थ से जुड़े तथ्यों के बारे में।

कई बीमारियों की वजह –
विशेषज्ञों के अनुसार प्रोसेस्ड फूड में अधिक मात्रा में कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है ताकि इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके लेकिन इनसे पेट संबंधी समस्याएं, मोटापा, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, जोड़ों के दर्द और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।

ये लोग रखें विशेष ध्यान –
जिन लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर हाई या लो की समस्या हो और किडनी के रोगियों को प्रोसेस्ड फूड खाने से बचना चाहिए। बच्चों को भी नूडल्स, पास्ता, चिप्स, स्नैक्स आदि की आदत न डालें क्योंकि इससे उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और उनका विकास प्रभावित होने लगता है। यही वजह है कि आजकल कम उम्र में ही बच्चे मोटापे का शिकार होने लगे हैं।

सीमित मात्रा में करें प्रयोग –
प्रोसेस्ड फूड आमतौर पर रेडी टू ईट होते हैं। इन्हें बनाने और खाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती इसलिए जब कोई भी व्यक्ति इन्हें खाता है तो शरीर में फील गुड हार्मोन स्रावित होते हैं जिससे व्यक्ति को स्वाद व संतुष्टि मिलती है। इसी फील गुड के चलते व्यक्तिको एक समय के बाद इनकी आदत हो जाती है और वह जरूरत से ज्यादा इनका प्रयोग करने लगता है। नतीजन मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पेट संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। इसलिए इनका प्रयोग न करें, ऐसा करना संभव न हो तो हफ्ते में एक से दो बार ही इन्हें खाएं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ –
प्रोसेस्ड फूड में मिलाए जा रहे प्रिजर्वेटिव्स शरीर को क्षति पहुंचाते हैं। इनका सामान्य एडेटिक्स कॉर्न स्टार्च है जो मोटापा बढ़ाता है। इसलिए इससे बचें। सब्जियों में फाइबर अधिक होता है इसलिए इनका प्रयोग अधिक करें। हमारे शरीर को रोजाना प्रोटीन की जरूरत होती है, 5 फीट ऊंचाई वाले व्यक्ति को प्रतिदिन 50 ग्राम प्रोटीन चाहिए। यह प्रोटीन फल और सब्जी से मिलना चाहिए।