पथरी का शरीर में बार-बार बनना सेहत के लिए सही नहीं। पथरी बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है और जब इसका आकार बढ़ जाता है तो पीठ में दोनों ओर दर्द शुरू होकर आगे की तरफ आता है। तेज दर्द के साथ उल्टी, पेशाब में जलन और पेशाब रुक-रुक कर आना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

प्रमुख वजह –
गुर्दे यानी किडनी की पथरी का मुख्य कारण है पानी कम पीना। यह तब होती है जब शरीर में पानी, नमक व मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। जिन लोगों को गठिया यानी गाउट होता है, उनमें भी पथरी अधिक बनती है। बीजयुक्त सब्जियों जैसे बैंगन, टमाटर, भिंडी, मसाले वाला भोजन, जंकफूड व चाय अधिक पीने से भी पथरी हो सकती हैै। बार-बार बुखार या टायफॉइड से किडनी कमजोर होने पर पथरी की आशंका रहती है।

ये हैं प्रकार
कैल्शियम स्टोन : पानी कम पीने और कैल्शियम डाइट ज्यादा लेने से 20-30 वर्ष की उम्र में यह ज्यादा बनती है।
सिस्टीन स्टोन : जो सिस्टीनूरिया (जब पथरी अमीनो एसिड सिस्टाइन से बने) से प्रभावित होते हैं, उन्हें यह पथरी होती है।
स्ट्रूवाइट स्टोन : यह उन महिलाओं को होती है जिन्हें बार-बार यूरिन इंफेक्शन की शिकायत रहती है।
यूरिक एसिड स्टोन : गठिया रोग से ग्रसित पुरुषों को यह पथरी होती है।

उपचार –
पथरी का एलोपैथिक इलाज सर्जरी है। होम्योपैथिक चिकित्सा में 30 एम-एम तक की पथरी को बिना ऑपरेशन के निकाला जा सकता है। 10 एम-एम की पथरी 3-4 सप्ताह में बाहर निकल सकती है, वहीं 10 एम-एम से बड़ी पथरी में 2-3 महीने तक लग सकते हैं।

ऐसे करें बचाव –
पेन किलर दवाएं बिना डॉक्टरी सलाह के न लें क्योंकि इनका सीधा प्रभाव गुर्दे एवं लिवर पर होता है और पथरी का खतरा रहता है। बुखार, टायफॉइड होने पर डॉक्टरी सलाह से ही दवाएं लें। ज्यादा तला-भुना भोजन, घी, पिज्जा, बर्गर आदि न खाएं। रोजाना 10-12 गिलास पानी पिएं। नियमित व्यायाम एवं योगासन करें। नींबू व मौसमी खाएं, ये पथरी को गलाकर बाहर निकालने में सक्षम हैं।