आंखें हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर के अन्य अंगों की तरह इनका भी व्यायाम जरूरी होता है। आइए जानते हैं आंखों के लिए आवश्यक व्यायाम के बारे में।

जब हमारी आंखें दूर की वस्तु को देखती हैं तो उस समय ये सीधी रहती हैं लेकिन जब नजदीक में काम करती हैं तो उस समय मीडियल रेक्टस मांसपेशी दोनों आंखों को अंदर की तरफ घुमाती है। लगातार पढ़ाई करने के बाद आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं और तनाव व सिरदर्द होने लगता है जिसे कन्वर्जेंस इंसफीसिएंसी कहते हैं।

फुल फेस मसाज : गर्म पानी में एक तौलिए को भिगोएं और निचोड़कर इस तौलिए को चेहरे पर रखें और नाक, गर्दन व गाल पर अच्छे से फिराएं। इसके बाद अंगुलियों के पोरों से माथे और बंद आंखों की मसाज करें।

पामिंग : कुर्सी पर बैठ जाएं, हथेलियों को रगड़कर गर्म करें, अब इन्हें दोनों आंखों पर रखें। आईबॉल पर प्रेशर न देते हुए धीरे से गहरी सांस लें और किसी अच्छी घटना के बारे में या भविष्य में होने वाली किसी बात के बारे में सोचें। इसके बाद हथेलियों को हटाएं और धीरे से आंखें खोलें। ऐसा दिन में कम से कम 3 मिनट तक करें।

गर्म व ठंडी सिकाई : दो तौलिए लें, एक को गर्म पानी में और दूसरे को ठंडे पानी में भिगोएं। पहले किसी एक तौलिए को चेहरे पर घुमाएं, फिर आंखों के आस-पास की जगह पर हल्के से दबाव दें। इस प्रक्रिया में पलकों को बंद रखें जिससे आंखों पर अच्छे से सेक हो सके। ऐसा दूसरे तौलिए से भी करें। इस मसाज के अंत में ठंडे पानी के तौलिए का प्रयोग करें। इस प्रक्रिया को आप दो से तीन मिनट तक कर सकते हैं।

एक्सरसाइज –

बच्चों के लिए –
बच्चे क्लास का हर सेशन खत्म होने के बाद पामिंग, आंखों को दांए-बाएं या ऊपर-नीचे घुमाएं, एक मिनट में 15-20 बार पलकों को झपकाकर आंखों को आराम दें।

नौकरीपेशा लोग पामिंग के साथ-साथ हर थोड़ी देर में ठंडे पानी से आंखों को धोएं। बुजुर्ग घास पर नंगे पैर चलें, रोजाना 14-20 मिनट वॉक करें और लंबी सांस लें, प्राणायाम व योगा करने से रक्तसंचार अच्छा होता है जो आंखों को स्वस्थ रखता है।

डॉक्टरी सलाह से ये व्यायाम अगर सुबह व शाम के समय 10 बार लगभग दो महीने तक किए जाएं तो कन्वर्जेंस इंसफीसिएंसी में आराम मिलता है।

पलकों को एक मिनट में लगभग 15-20 बार झपकाने से आंसुओं की परत आंखों को गीला रखती है और ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या नहीं होती।

खानपान : गाजर, मटर, मेथी, पालक, बथुआ जैसी सब्जियों के साथ-साथ पपीता, मौसमी जैसे फलों को डाइट में शामिल करें। इनके अलावा टमाटर खाने से भी आंखों को कैरोटीन और विटामिन-ए की पूर्ति हो जाती है।

’20-20-20’का नियम –
कम्प्यूटर पर काम करने वाले लोगों को इस नियम को फॉलो करना चाहिए-
कम्प्यूटर स्क्रीन 20 इंच की दूरी पर हो और काम करने के 20 मिनट बाद 20 फीट की दूरी पर रखी चीजों को 20सेकेंड तक देखें। इस व्यायाम से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और तनाव, सिरदर्द में भी लाभ होता है।
ध्यान रहे कि कमरे की रोशनी व स्क्रीन की चमक बराबर हो।
कम्प्यूटर पर काम करते समय एंटीग्लेयर स्क्रीन, एंटीरिफ्लेक्टिव कोटेड या यूवी प्रोटेक्टेड चश्मे का प्रयोग करें।
लंबे समय तक काम करने के बाद आंखों को बंद कर आराम दें।
रोज 8-10 गिलास पानी पिएं। कोल्ड ड्रिंक, कॉफी, चाय, शराब आदि से परहेज करें।
रोजाना कम से कम 20 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करें, टहलना व तैरना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। साथ ही आठ घंटे की नींद जरूर लें।
आंखों को धूल-मिट्टी और धूप से बचाने के लिए घर से बाहर निकलते समय चश्मे का प्रयोग करें।