शरीर में दो किडनी (गुर्दे) होती है। किडनी लिवर के ठीक नीचे होती है। आंतरिक अंगों में सबसे बड़ी होती है। बाएं तरफ की किडनी दाहिनी की अपेक्षा छोटी होती है। किडनी खून में मौजूद टॉक्सिन्स (विषैले तत्वों) को छान कर साफ करती है जो यूरिन के जरिए बाहर निकलते हैं।
इन लक्षणों पर ध्यान दें
क्रॉनिक किडनी डिजीज में किडनी पहले फूलती है फिर सिकुड़कर छोटी हो जाती है। इसके लक्षण देर से दिखते हैं। रोगी के पैरों में सूजन, चेहरे पर सूजन, खून की कमी, भूख लगना बंद हो जाना, पेशाब की मात्रा में कमी, शरीर में खुजली, शरीर का रंग काला पडऩा प्रमुख लक्षण हैं। मरीजों में हृदय संबंधी समस्या भी होती है। महिलाओं को माहवारी में ज्यादा दर्द, संबंध के दौरान तकलीफ होती है।
इन जांचों से करते बीमारी की पहचान
किडनी बीमारियों की पहचान के लिए ब्लड यूरिया, सिरम क्रिएटिनिन, सिरम इलेक्ट्रोलाइट व किडनी फंक्शन टेस्ट कराते हैं। 40 की उम्र के बाद ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीजों को ब्लड प्रेशर, एचबीए1सी की जांच कराते हैं। परिवार में किसी को किडनी रोग है तो अन्य को खास खयाल रखना चाहिए।
दवाओं से इलाज
क्रॉनिक किडनी डिजीज के रोगी का इलाज दवाओं व डायलिसिस से किया जाता है। किडनी फेल होने पर प्रत्यारोपण अंतिम विकल्प है। क्रॉनिक रीनल फेल्योर में गुर्दा रोगी का हीमोडायलिसिस किया जाता है। इसमें सप्ताह में तीन बार और माह में बारह बार रक्त की कृत्रिम रूप से सफाई की जाती है।

– डॉ. धनंजय अग्रवाल, वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ, जयपुर