जंकफूड, अधिक तली भुनी चीजें, सॉफ्ट ड्रिंक्स और आउटडोर एक्टिविटी की कमी के कारण बच्चों में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हाल ही में अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक देश के एक महानगर में 19 साल से कम उम्र के करीब 23 प्रतिशत बच्चों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया गया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इस शहर में ही नहीं बल्कि देशभर के अन्य शहरी इलाकों में 20 साल तक के बच्चों में एलडीएल का स्तर ज्यादा होने की आशंका है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में इससे कम उम्र में हृदय रोग व अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

जानिए बच्चों में कोलेस्ट्रॉल के खतरों के बारे में-
कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा पदार्थ होता है जिसका निर्माण हमारे शरीर में लिवर करता है। यह शारीरिक गतिविधियों में मदद करता है। लेकिन कई बार खराब खानपान या कुछ अन्य वजहों से शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है। शारीरिक गतिविधियों के अभाव में शरीर इसे पचा नहीं पाता और यह वसा के रूप में शरीर में जमने लगता है। इससे रक्तसंचार प्रभावित होने लगता है व गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

कब कराएं जांच
इसके कोई लक्षण नहीं होने से यह परेशानी खुलकर सामने नहीं आ पाती है। इसलिए फैमिली हिस्ट्री व मोटापे की समस्या होने पर शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह से बच्चों की पहली जांच 2 वर्ष में, दूसरी 10-11 की उम्र में व तीसरी 17-18 वर्ष की आयु में करा लेनी चाहिए। भविष्य में किसी प्रकार के रोग की आशंका न हो, इसके लिए डॉक्टरी सलाह से 17-18 साल के बीच बच्चों की एक बार जांच करा लेना ठीक माना जाता है।

कोलेस्ट्रॉल : अच्छा और बुरा
शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ‘लिपिड प्रोफाइल’ जांच से देखा जाता है। इसमें खासतौर पर एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) व एचडीएल (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन) का स्तर देखते हैं। सामान्य रूप से शरीर में एलडीएल की अधिक मात्रा व्यक्ति में बीमारियों का कारण बनती है। इसलिए इसे बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। एलडीएल शरीर में 70 मिलिग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं एचडीएल नाड़ियाें के अंदर से गंदगी को बाहर निकालने का काम करता है, इसलिए इसे अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। इसकी अधिकता स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है। यह 40 मिलिग्राम प्रति डेसीलीटर से कम नहीं होना चाहिए।

कैसें करें बचाव
अपने शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल को आप संतृप्‍त वसा में कमी, नियमित व्‍यायाम, धूम्रपान छोड़कर और एल्‍कोहल का सेवन कम करके आप कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित कर सकते हैं।