फे्रक्चर होने पर प्राथमिक उपचार क्या किया जाए ?

जिस जगह की हड्डी टूट गई हो, उस अंग को स्पिलिंट (खपच्ची, पट्टी) लगाकर हिलने न दें। अगर खून बह रहा हो तो इस पर पट्टी बांध दें और मरीज को फौरन नजदीकी डॉक्टर के पास या अस्पताल लेकर जाएं।

प्लास्टर लगने के बाद क्या सावधानी रखें ?
जिस अंग पर प्लास्टर लगा हो उसे लटकाए नहीं। अंगुलियों का निरंतर व्यायाम करें। प्लास्टर को पानी से बचाएं। मरीज को किसी भी प्रकार की दिक्कत जैसे अंगुलियों में सूजन, नीली पडऩा या खुजली हो तो डॉक्टर को फौरन दिखाएं।

किन उपायों से विकलांगता से बचा जा सकता है ?
सर्वप्रथम पहलवानों व नीम-हकीम से इलाज न करवाएं। हड्डी के डॉक्टर से ही इस संबंध में सलाह लें व इलाज करवाएं। हड्डी जुड़ने के उपचार के बाद विशेषज्ञ की सलाह से व्यायाम (फिजियोथैरेपी) करें।

घुटने के जोड़ों को जल्दी खराब होने से कैसे बचाएं ?
वजन न बढऩे दें। उकड़ू या लंबे समय तक आलती-पालती मारकर बैठने से बचें। रोजाना लंबे समय तक चलने या खड़े रहने से भी जोड़ प्रभावित होते हैं। जोड़ों के रोग या इनमें चोट लगने पर फौरन उपचार कराएं व विशेषज्ञ के बताए अनुसार व्यायाम करें। कैल्शियम व विटामिन-डी उचित मात्रा में लें।

वृद्धावस्था में हड्डी टूटने का खतरा अधिक क्यों होता है ?
कैल्शियम की कमी, भोजन में पौष्टिकता का अभाव और शारीरिक गतिविधियां कम होने से वृद्धावस्था में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के क्या उपाय हो सकते हैं ?
कैल्शियम व इससे भरपूर पौष्टिक आहार लें। धूम्रपान व अल्कोहल से पूरी तरह दूर रहें।
उचित दवाइयां, विटामिन-डी व बी का इस्तेमाल डॉक्टर के बताए अनुसार करें।
मरीज को हड्डियों या जोड़ों की तकलीफ है तो उचित इलाज कराएं।

हड्डियों की मजबूती के लिए दवाओं के अलावा अन्य उपाय क्या हैं ?
दूध, पनीर व अलसी को खानपान में शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम करें व रोजाना 5-10 मिनट धूप में बैठें।