एंटीऑक्सीडेंट्स का स्त्रोत तुलसी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। जानें कैसे-

घर की औषधि तुलसी हर तरह से सेहत के लिए अच्छी होती है। औषधीय गुणों व एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर तुलसी के पत्तों को मौसमी रोगों से बचाव के लिए रोजाना खाने या उबालकर बनाए गए काढ़े को पीने की सलाह देते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्ते तासीर में काफी गर्म होते हैं जिन्हें उबालना नहीं चाहिए। तुलसी में पारा होता है जिसे उबालने से इसकी तासीर और ज्यादा बढ़ जाती है। इसके बाद इसके प्रयोग से शरीर का तापमान भी बढ़ता है जिससे फोड़े-फुंसी, नकसीर, रक्तस्त्राव की समस्या हो सकती है। चाय या काढ़ा बनाने के बाद ऊपर से तुलसी के पत्तों को डालें। 2-3 पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े कर निगलकर ऊपर से आधा कप पानी पी लें।

महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान कमर व पेट दर्द में राहत के लिए एक चम्मच तुलसी के रस का सेवन करें दर्द में आराम मिलेगा। तुलसी के पत्ते चबाने से भी मासिक धर्म नियमित रहता है। सिर का भारी होना, सिर दर्द, माइग्रेन, मिरगी, नासिका रोग आदि में तुलसी का सेवन फायदेमंद होता है। तुलसी, कफ, वात, विष विकार, श्वांस-खाँसी और दुर्गन्ध नाशक है। पित्त को उत्पन्न करती है तथा कफ और वायु विकास को खत्म करती है।