क्षमतानुसार इस मुद्रा में कुछ देर बने रहें और पैर सीधे रखें
पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद पैरों को सीधा और लंबा कर आराम देते हुए फैलाएं। हथेलियों को जमीन पर टिकाएं। ध्यान रखें कि इस दौरान जमीन व हथेलियों के बीच गैप बिल्कुल न हो। साथ ही हथेलियां कंधे के बराबर होनी चाहिए। इसके बाद सिर को जमीन पर लगाकर आंखों को बंद कर लें और सांस भरते हुए ठोड़ी को ऊपर उठाएं। ऐसा करते हुए धीरे-धीरे पहले गर्दन को आसमान की ओर उठाएं और फिर पेट वाले हिस्से को ऊपर उठाएं। क्षमतानुसार इस मुद्रा में कुछ देर बने रहें और पैर सीधे रखें।
फायदे : इसे पाचनतंत्र, रीढ़ की हड्डी, कमर आदि से जुड़े रोगों में नियमित कर सकते हैं। यह महिलाओं में अनियमित माहवारी को सामान्य करता है।
ध्यान रखें : जिसकी पूर्व में पेेट और कंधे से जुड़ी किसी प्रकार की सर्जरी हो चुकी हो, वे इसे न करें। गर्भवती महिला इसे करने से बचें।
संपूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्यनमस्कार में भुजंगासन का सातवां क्रम आता है।