वजह: अव्यवस्थित जीवनशैली, तनाव, हार्मोंस में गड़बड़ी, अधिक चाय-कॉफी पीने, रजोनिवृत्ति के बाद किसी प्रकार का मानसिक या शारीरिक रोग, भय के अलावा गर्भावस्था के दौरान प्रसव की चिंता, पेशाब का बार-बार आना, एसिडिटी व पैर-पेट में दर्द बने रहने से भी अनिद्रा की दिक्कत होती है।
परेशानी: नींद न आने से मन उदासीन रहने के साथ रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। चीजों को भूलने व मूड स्विंग की समस्या देखने को मिलती है। स्वस्थ रहने के लिए 7-8 घंटे की नींद जरूरी है।
इलाज : मरीज को दिनचर्या में बदलाव करने और कुछ खास बातों को ध्यान में रखने की सलाह दी जाती है। जैसे-
नियमित व्यायाम करें और दिन के समय अधिक न सोएं।
सोने से पहले तनाव को भूलने की कोशिश करें।
कोल्ड ड्रिंक, चाय या कॉफी सोने से पहले न पीएं।
डिनर में हल्का व सुपाच्य भोजन करें।
सोने के लिए शांत व कम रोशनी वाली जगह को चुनें।
डॉ. सुशीला खुटेटा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ