रक्तदान महादान है
रक्तदान महादान है। भले ही आज विज्ञान ने कितनी ही तरक्की कर ली हो रक्त एक ऐसी चीज है, जिसका कोई विकल्प नहीं है। गंभीर बीमारी हो या दुर्घटना में रक्त की कमी से भारत में हर साल 30 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है, जबकि इस कमी को मात्र एक फीसद आबादी रक्तदान कर पूरा कर सकती है। रक्त की कमी को खत्म करने के लिए दुनियाभर में 14 जून 2019 को विश्व रक्तदान दिवस (World blood donor Day) मनाया जाता है।

World Blood donor day इसलिए मनाया जाता है
14 जून 1868 को वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्म हुआ था। उन्होंने इंसानी रक्त में एग्ल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर ब्लड ग्रुप ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी। खून के इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी खोज के लिए कार्ल लैंडस्टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था। वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी दुनिया में विश्व रक्तदान दिवस World Blood Donor Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करना है और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है।

रक्तदान से नहीं आती कमजोरी
रक्तदान से शरीर में किसी तरह की कमजोरी नहीं होती है। गर्मियों में भी रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं होती है। लोग धूप और गर्मी को देखकर रक्तदान करने से बचते हैं। जबकि गर्मियों में खून की मांग काफी रहती है।