मिर्गी में रोगी को बेहोशी या बेहोशी के बिना झटके आते हैं और कुछ समय के लिए याद्दाश्त चली जाती है। यदि किसी रोगी में तीन बार से अधिक दौरों की हिस्ट्री मिलती है तो उसे मिर्गी का रोगी कहा जाता है।

मिर्गी की पहचान –
बेहोशी के साथ दौरे आना, मुंह से झाग निकलना और जीभ का कट जाना प्रमुख लक्षण हैं।

कारण –
60 % रोगियों में मिर्गी का कारण पता नहीं होता है।
40 % रोगियों में निम्न कारण हो सकते हैं-
सिर की चोट
दिमाग का इंफेक्शन
दिमाग का विकास ठीक से न होना
मस्तिष्क में ब्लीडिंग या ऑक्सीजन की कमी होना।
रक्त में शुगर, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा हिमोग्लोबिन की कमी।

बचाव और उपचार –
पोषक आहार लें।
धूप में चश्मा पहनें और शरीर को ढकें।
रात को पर्याप्त नींद लें।
ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर फूड जैसे- अलसी के बीज, अखरोट और फिश लें सकते हैं।
अधिक ठंडे या बहुत गर्म पानी से न नहाएं।
गुनगुना पानी पीएं।

इसके रोगी सोते समय और सुबह नाक में बादाम का तेल, गाय का घी डाल सकते हैं। इससे भी राहत मिल सकती है।