तेज खर्राटे लेने वाले लोगों की हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है। खर्राटे से ‘रयूमेटायड आर्थराइटिस’ होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही सांस संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे रोगियों की नींद अच्छे से पूरी नहीं होती है। थकान की समस्या रहती है। प्रभावित व्यक्ति को तुरंत इलाज करवाना चाहिए। (ताइवान मेडिकल यूनिवर्सिटी की शोध)

एक्सपर्ट : ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपीनिया में अपना वजन नियंत्रित करें। मोटा तकिया न लगाएं। खाने और सोने में दो घंटे का अंतराल रखें। रात का भोजन हल्का लें। नशा न करें, नियमित व्यायाम करने से फायदा होगा।

गैस से नहीं आती नींद –
जिन्हें गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स बीमारी होती है उन्हें ठीक से नींद नहीं आती। रात को सीने में जलन, गैस, खट्टी डकार आदि दिक्कतें होने से नींद उचट हो जाती है। सोते समय तकिया चार से छह इंच ऊंचा रखना चाहिए। सोने से कम से कम 3-4 घंटे पहले खा लें। फास्ट फूड, चॉकलेट, कैफीन, शराब से दूर रहें। साथ ही वजन कम करने की कोशिश करें। (ऑस्टे्रलिया मेडिकल यूनिवर्सिटी की रिसर्च)
एक्सपर्ट : खाना खाते ही तुरंत सोने से अम्लीय स्तर बढता है। खानपान में अम्लीय पेय व सोने से पहले अधिक पेय-पदार्थ न लें, लंबे समय तक खाली पेट न रहें। रात को हल्का भोजन करें। नियमित व्यायाम करें।

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