दीवार पर चॉक या नाखून घिसने, जूता रगडऩे, चम्मच बजाने, दांत पीसने आदि हरकतों से निकलने वाली आवाजों से शरीर में अजीब सी संवेदनशीलता महसूस होती है। इससे चिड़चिड़ापन के अलावा बेचैनी और झल्लाहट भी बढ़ती है। जानें ऐसा क्यों होता है?
शोध है आधार
स्पेन के साइकोलॉजिस्ट द्वारा किए शोध में सामने आया है कि नाखून के दीवार पर घिसने या अन्य आवाजें शरीर में एक ऐसी भावना पैदा करती है जिसे शब्दों में जाहिर नहीं किया जा सकता है। साइकोलॉजी के फ्रंटियर जर्नल में प्रकाशित इस शोध में पाया गया कि लोगों को ऐसी आवाजों से चिढ़ होने लगती है।
मिसोफोनिया में होता है ऐसा
यह एक डिसऑर्डर है जिसमें शरीर के अंदर कुछ खास तरह की आवाजों से भावनात्मक ही नहीं बल्कि फिजियोलॉजिकल प्रतिक्रिया भी होती है। इस डिसऑर्डर को सेलेक्टिव साउंड सेंसिटिविटी सिंड्रोम भी कहते हैं। एक बार होने वाली आवाज के अलावा कई बार इस सिंड्रोम में एक ही आवाज के बार-बार होने या किसी वस्तु के बार-बार बजने से निकलने वाली आवाज पर भी व्यक्ति प्रतिक्रिया दिखाता है। शरीर में कंपन भी कभी-कभार होता है।
इन्हें होती है ज्यादा दिक्कत
इस समस्या का कोई निर्धारित कारण नहीं है। ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) जैसे मानसिक विकार से पीडि़त व्यक्ति को मिसोफोनिया की शिकायत तुलनात्मक रूप से ज्यादा रहती है। जिस तरह से ओसीडी के मरीज एक ही काम को बार-बार करते हैं, वैसे ही वे बिना किसी कारण बार-बार उस तरह की आवाज भी महसूस करने लगते हैं। इसके अलावा भावुकता का स्तर अधिक होने के कारण महिलाओं को इस तरह की दिक्कत ज्यादा होती है। इलाज के रूप में दिमाग को नियंत्रित करना आवश्यक है।
एक्सपर्ट : डॉ. पुनीत रिझवानी, सीनियर फिजिशियन, महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर

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