झारखंड के जमशेदपुर जिला में एक छोटा-सा गांव है-सोनारी। साल 2011 में यह गांव उस समय अचानक चर्चा में आ गया था, जब इस गांव की एक बेटी ने ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल समेत तीन पदक दिलाया था। आज वही गंगाबाई कागज के ठोंगे बनाकर परिवार का पेट पालने को मजबूर है। जान कर दु:ख होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की आर्थिक तंगी की यही सच्चाई है। 

जमशेदपुर के सोनारी की रहने वाली नि:शक्त गंगाबाई ने साल 2011 में एथेंस स्पेशल ओलंपिक में देश को एक गोल्ड एवं दो सिल्वर मेडल दिलाया था। जीत के कुछ ही महीनों बाद से गंगाबाई गुमनामी के अंधेरे में जाती रही। घर की स्थिति तब और दयनीय होने लगी, जब परिवार चलाने में आर्थिक दिक्कत आने लगी।

सरकार या प्रशासन ने नहीं की मदद

स्पेशल बैडमिंटन में पदक जीत चुकी गंगाबाई बेहद गरीब परिवार से आती है। परिवार में उसके अलावे उसके बूढ़े मां—बाप हैं। खबरों के मुताबिक सरकार ने या स्थानीय प्रशासन ने उसकी मदद की पहल नहीं की। गनीमत यह रहा कि उसे निजी संगठनों से मदद मिल रही है। 

गंगाबाई की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक सामाजिक संस्था ने उसे ठोंगा बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा। संस्थान के अध्यक्ष अवतार सिंह का कहना है कि सरकार को ऐसे खिलाड़ियों की मदद करनी चाहिए।

माता-पिता की मांग, मिले सरकारी नौकरी

गंगाबाई के पिता सोहन लाल साहू एवं माता दुगुनी देवी आग्रह करते हुए कहते हैं कि देश को गोल्ड मेडल दिलाने के बावजूद बेटी को यह सब करना पड़ रहा है। सरकार को उसे अनुदान राशि एवं सरकारी नौकरी देनी चाहिए।