नई दिल्ली : क्या वाकई चुनाव से पहले का हफ्ता मोदी को हलकान कर रहा है? क्यों भाजपा को पिछले तीन दिनों में झटकों पर झटके लग रहे हैं? देश में फिर मोदी लहर लाने की भाजपा की तैयारियों पर पिछले तीन दिन हथौड़े की तरह पड़े हैं। एक के बाद एक पांच बड़े मसलों पर पीएम नरेंद्र मोदी को मुंह की खानी पड़ी हैं। खासकर वो मुद्दे जिन पर सवार होकर भाजपा चुनावी वैतरणी पार करना चाह रही थी, वहीं मुद्दे मोदी को चुनावों के बीच भंवर में डुबाने पर तुले हैं।

आखिर क्या हैं वो मसले जिन पर मोदी को अप्रत्याशित तौर पर झटके मिले हैं। इन झटकों की उम्मीद न तो अमित शाह ने की होगी और न ही मोदी ने, लेकिन पिछले कुल तीन दिन नरेंद्र मोदी के लिए अच्छे नहीं कहे जा सकते। आइए बात करते हैं उन मुददों की, जिनके चलते मोदी सरकार को मुंह की खानी पड़ी है।

1. नमो टीवी

चुनाव के वक्त आचार संहित को धता बताते हुए जिस तरह भाजपा ने नमो टीवी लॉन्च किया, विरोधी आगबबूला हुए तो आम जनता भी चकित दिखी। मामला गरमाया तो सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी सफाई दी कि यह महज विज्ञापन के लिए एक प्लेटफॉर्म है और इसके लिए मंत्रालय से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं।

थक हारकर जब पूर्व नौकरशाहों के एक गुट ने मामला राष्ट्रपति तक पहुंचाया तो चुनाव आयोग हरकत में आया। इसके पश्चात चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा कि नमो टीवी पर किसी भी रिकॉर्डेड राजनीतिक सामग्री के प्रसारण के लिए मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी ऑफ दिल्ली से इजाजत लेनी होगी। अब नमो टीवी के जरिए चुनावी लाभ लेने की भाजपा की कोशिशों को ये बड़ा झटका है।

2. रफाल

रफाल पर एक माह पहले फायदे में दिख रही मोदी सरकार को ऐन चुनाव से पहले उच्चतम न्यायालय ने झटका दे डाला। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले की दोबारा सुनवाई का फैसला करते हुए स्पष्ट कर दिया कि लीक हुए दस्तावेज अब सुनवाई का हिस्सा होंगे और याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई के दौरान इन दस्तावेजों को वैधता दी जाएगी।

अब इसे मोदी सरकार के लिए स्पष्ट झटका माना जाएगा। जहां मोदी इस मुद्दे को बोतल में बंद करके चौकीदार – चौकीदार खेल रहे थे, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस बोतल के जिन्न को फिर से बाहर निकाल कर मोदी के लिए आफत पैदा कर दी है।

3. मोदी की बायोपिक पर रोक

चुनावों के समय बायोपिक रिलीज करवाकर नरेंद्र मोदी जो राजनैतिक लाभ लेना चाह रहे थे, चुनाव आयोग ने उस सपने पर पानी फेर दिया। फिल्म की मतदान के दौरान रिलीज को लेकर विपक्षी दलों ने ऐतराज जताया और नतीजा मोदी के खिलाफ गया।

कांग्रेस ने बायोपिक की रिलीज डेट पर ऐतराज करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग खारिज करते हुए गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी। अब चुनाव आयोग के लिए निष्पक्ष दिखने का दबाव भी था और फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई।

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4. सेना के नाम पर वोट अब नहीं

पुलवामा शहीदों के नाम पर वोट मांग कर चुनावी वैतरणी पार करने की भाजपा की मंशा तब उल्टी पड़ गई जब कांग्रेस के साथ साथ सेना ने भी अपनी शहादत का गलत लाभ लेने की शिकायत कर डाली।

पिछले दिनों मोदी ने एक रैली में पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट मांगे, वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक चुनावी भाषण में देश की सेना को ‘मोदी की सेना’ कहते हुए जिक्र किया तो विरोधियों के साथ साथ सेना भी भड़क उठी।

भाजपा द्वारा सेना के नाम और शहादत का फायदा उठाने की कवायद का विरोध करते हुए हाल ही में तीन सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों समेत 150 से ज्यादा पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की। इतना ही नहीं ये चिट्ठी चुनाव आयोग को भी भेजी गई है और चुनाव आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है।

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5. इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड पर अदालती फैसला

इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड की स्कीम की वैधता जारी रखने की भाजपा की कोशिशों पर पानी फिर गया जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया कि सभी राजनीतिक दल 30 मई तक चुनाव आयोग को इस संबंध में सभी जानकारी मुहैया करा दें। इससे पहले इस मसले पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि चुनाव में दलों के पास पैसा कहां से आ रहा है, ये जानकर जनता क्या करेगी। इसलिए स्कीम की वैधता समाप्त नहीं की जानी चाहिए।

लेकिन भाजपा की मांग को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट एक एनजीओ की अरजी पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक सभी दल चंदे की सारी जानकारी नहीं देते, इसकी वैधता बढ़ाए जाने को लेकर सुझाव नहीं माने जाएंगे।

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