नई दिल्ली। राज्यसभा में अरुण जेटली की जगह इस बार सदन के नेता केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत होंगे। मोदी सरकार में दूसरी बार सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले थावर चंद गहलोत मध्य प्रदेश से आते हैं। गहलोत भाजपा के दलित चेहरों में एक वरिष्ठ नेता हैं। बता दें कि अरुण जेटली ने इस बार खुद ही मोदी कैबिनेट में मंत्री बनने से मना कर दिया है। अरुण जेटली ने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री नहीं बनाने की मांग की थी। अरुण जेटली पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। वह राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं है।

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आरक्षण बिल पेश करने में अहम भूमिका निभाए थे गहलोत

बता दें कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सामाजिक एवं सहकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने दिव्यांग लोगों के लिए कई कार्य किए हैं। लोकसभा और राज्य सभा में सवर्ण आरक्षण बिल पास कराने के दौरान थावरचंद गहलोत ने अहम भूमिका निभाई थी। बिल को थावर चंद गहलोत ने सदन में पेश किया था। विपक्षी दलों के साथ थावरचंद गहलोत ने समन्वय स्थापित किया था।

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कांग्रेस के पास लोकसभा में नहीं है बहुमत

गौरतलब है कि कांग्रेस को दूसरी बार लोकसभा में विपक्ष के नेता बनाने के लिए वह आंकड़ा नहीं मिला है। लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 54 सीट लानी होती है। पिछले बार मल्लिकार्जुन खड़गे को सदन में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इस बार मनीष तिवारी के नाम चर्चा है। हालांकि अभी तक इसपर तस्वीर साफ नहीं हुई है।