नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विश्वविद्यालयों में आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला किया है। देश के सभी विश्वविद्यालयों में 200 प्‍वाइंट रोस्‍टर जारी रहेगा। इससे ये साफ हो गया कि संस्थान में आरक्षण लागू करने की ईकाई विश्वविद्यालय ही है। इसके लिए केंद्रीय शैक्षिक संस्‍थान (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) विधेयक- 2019 विधेयक पेश करने को मंजूरी मिल गई है। संसद के आगामी संभ में इसे पेश किया जाएगा।

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सरकार की ओर क्या कहा गया?

सरकार की ओर से कहा गया है मंत्रिमंडल के निर्णय से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित लोगों की मांगों का हल होगा। संविधान के तहत उनके अधिकार सुनिश्चित होंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी 10 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा।

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कैबिनेट के इस फैसले का क्या होगा असर?

– 200 प्‍वाइंट रोस्‍टर वाले शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती से 7000 से अधिक मौजूदा रिक्तियों को भरे जाने की अनुमति होगी।

– अनुच्‍छेद 14, 16 और 21 के संवैधानिक प्रावधानों की अनुपालना सुनिश्चित होगी।

– शिक्षकों के संवर्गों में सीधी भर्ती में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्‍व सुनिश्चित होगा।

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नए विधेयक से कैसे होगा फायदा?

-200 प्‍वाइंट रोस्‍टर पर लागू होने के बाद विश्‍वविद्यालय और महाविद्यालय को एक यूनिट के रूप में मानेगा। अब से विभाग और विषय को यूनिट नहीं माना जाएगा।

– शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती में पदों के आरक्षण के लिए विश्‍वविद्यालय, शैक्षिक संस्‍थानों को यूनिट माना जाएगा, न कि विभाग को।

– जनरल कास्ट कोटे के लिए 50+10% रिजर्वेशन को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।