नई दिल्‍ली। अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष का पद फिर से संभालने वाली सोनिया गांधी (Soniya Gandhi ) के सामने सियासी चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है। दिसंबर से पहले महाराष्‍ट्र, झारखंड और हरियाणा में विधानसभा चुनाव ( Haryana Vidhansabha Chunav ) प्रस्‍तावित है। तीनों राज्‍यों में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए पार्टी को जीत की दरकार है।

लेकिन पार्टी के अंदर आंतरिक कलह चरम पर होने से प्रभावी नेताओं को एकजुट कर पाना सोनिया गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। खासकर हरियाणा ( Haryana Vidhansabha Chunav ) में इस चुनौतियों से पार पाना बहुत मुश्किल है।

ऐसा इसलिए कि हरियाणा में पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) 18 अगस्‍त को चुनावी महारैली करने जा रहे हैं।

इस रैली में उन्‍होंने सोनिया गांधी (Soniya Gandhi ), राहुल गांधी व अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं ने आमंत्रित नहीं किया है। इससे साफ है कि सोनिया गांधी की पार्टी को एकजुट करने की क्षमता की परीक्षा रोहतक में बहुत जल्द होने वाली है।

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हुड्डा की रैली से कांग्रेस को नुकसान की आशंका

ताज्‍जुब की बात यह है कि 2005 की शुरुआत से लेकर 2014 के अंत तक राज्य में कांग्रेस सरकार चलाने के लिए सोनिया गांधी (Soniya Gandhi ) ने भजनलाल को किनारे कर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) को तरजीह दी थी। वही हुड्डा कांग्रेस के खिलाफ चुनाव से पहले रैली करने जा रहे हैं।

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हरियाणा कांग्रेस में टूट का खतरा

यही कारण है की हरिायाणा में हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) की तरफ रैली का आयोजन किया जाना कई सवाल खड़ा करता है। क्या यह उनकी तरफ से अक्टूबर में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव ( Haryana Vidhansabha Chunav ) से पहले प्रदेश कांग्रेस को तोड़कर एक क्षेत्रीय दल बनाने का पूर्व संकेत है? या महज चुनाव से पहले सौदेबाजी का महौल बनाने की कवायद है।

सोनिया गांधी के लिए चुनौती

हरियाणा में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) की सियासी रैली से प्रदेश कांग्रेस में भगदड़ की स्थिति है। पार्टी सर्किल में सबकी नजर इस पर है कि सोनिया गांधी और उनकी टीम हुड्डा की तरफ से पेश की जा रही चुनौती को किस तरह लेती है, क्योंकि इससे यह भी पता चलेगा कि वह अपनी दूसरी पारी में सौदेबाजी करने वालों के साथ किस तरह निपटती हैं। क्या वह उन्हें जाने देंगी या उनकी बात मानेंगी।

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एआईसीसी के नेता को नहीं भेजा निमंत्रण

प्रदेश कांग्रेस के दिग्‍गज नेता हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) और सोनिया के संबंध उस समय तनावपूर्ण हो गए थे, जब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने 2016 में कांग्रेस के राज्यसभा कैंडिडेट आरके आनंद का सपोर्ट करने से मना कर दिया था।

अब उन्होंने ‘परिवर्तन महारैली’ में राज्य की पार्टी यूनिट या ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के किसी नेता को नहीं बुलाया है। इन सबसे मामला रहस्यमय हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस के नेता दुविधा में फंस गए हैं।

हुड्डा ने ऐसा क्‍यों कहा

18 अगस्‍त की रैली के बारे में पूछे जाने पर हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले पांच साल में अपना एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है। राज्य की जनता भरोसेमंद विकल्प का इंतजार कर रही है। इसलिए चुनाव से पहले उनके सामने भाजपा सरकार के मुकाबले में मजबूत विकल्प पेश करने की जरूरत है।

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क्‍या चाहते हैं हुड्डा

हरियाणा के रोहतक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ( Bhupinder Singh Hooda ) से निपटना सोनिया गांधी (Soniya Gandhi ) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसा इसलिए कि हुड्डा हरियाणा ( Haryana Vidhansabha Chunav ) में पार्टी के प्रमुख अशोक तंवर की जगह लेना चाहते हैं।

अशोक तंवर को राहुल गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री की इच्छा के विरुद्ध प्रदेश अध्‍यक्ष पद पर नियुक्त किया था।