नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन चुनाव ( DUSU Election) में एकतरफा भगवा लहर है। अभी तक हुए मतगणना के शुरुआती रुझानों में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ( RSS ) से संबंद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( ABVP ) आगे चल रहा है। एबीवीपी ने डूसु के अध्यक्ष, महासचिव, सचिव और संयुक्त सचिव समेत सभी 4 पदों पर बढ़त बना रखी है।

बता दें कि साल 2018 के चुनाव में भी एबीवीपी ने ही बाजी मारी थी। अध्यक्ष पद समेत भगवा समर्थित छात्र संगठन ने तीन पदों पर जीत दर्ज की थी। डूसू के एक पद पर कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई ने जीत हासिल की थी।

इस बार एबीवीपी ने अध्‍यक्ष पद के लिए अग्रसेन कॉलेज के अक्षित दहिया को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने महिला कैंडिडेट पर दांव लगाते हुए चेतना त्यागी को मौका दिया है। वामपंथी संगठन आइसा से दामिनी काइन चुनावी समर में हैं। AIDSO से रोशनी चुनाव लड़ रही हैं।

एनएसयूआइ ने लगाए अनियमितता का आरोप

डूसू चुनाव में एनएसयूआइ ने डीयू प्रशासन और एबीवीपी पर आरोप लगाए हैं। एनएसयूआइ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नीरज मिश्र ने कहा कि डूसू के संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार अभिषेक चपराना को गुरुवार को दयाल सिंह कॉलेज में पुलिस ने गलत तरीके से गिरफ्तार किया।

एनएसयूआइ के सचिव पद के उम्मीदवार आशीष लांबा के बैलेट नंबर को दबाने पर ईवीएम में लाइट नहीं जल रही थी। इससे साफ है कि डीयू प्रशासन एनएसयूआइ को हराने में जुटा है। एबीवीपी को जिताने के लिए ऐसे काम किए जा रहे हैं।

पुलिस ने आरोप को बताया निराधार

वहीं पुलिस ने एनएसयूआइ के आरोपों को गलत बताया है। पुलिस का कहना है कि आचार संहिता के तहत चुनाव के दौरान कोई भी वोट नहीं मांग सकता है। जबकि अभिषेक दयाल सिंह कॉलेज के बाहर वोट मांग रहे थे। इसलिए उन्हें सिर्फ एक जगह पर बैठाया गया था। उन्हें गिरफ्तार करने का आरोप गलत है।