राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर मांग की कि सरकार को महा पोर्टल को खत्म कर देना चाहिए। अब इसके एक दिन बाद ही सोमवार को शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक जांच से पता चलता है कि यह मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की तरह ही है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार की ओर से महा पोर्टल की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों को सरकार में रोजगार के अवसरों से संबंधित जानकारी प्रदान करने में मदद करना था।

महा पोर्टल के बारे में मिल चुकी हैं कई शिकायतें

मुख्यमंत्री के सलाहकार शिवसेना नेता किशोर तिवारी ने कहा कि- ”अतीत में महा पोर्टल के बारे में कई शिकायतें मिल चुकी हैं। व्यापक संदेह है कि कुछ नामों/उपनामों को प्राथमिकता दी गई थी। कुछ विशेष जातियों/समुदायों का पक्ष लेने के लिए अन्य के नाम जानबूझकर हटा दिए गए थे।” उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की ओर से शुरू की गई ई-टेंडरिंग प्रक्रियाओं में व्यापक अनियमितताओं की इसी तरह की शिकायतें थीं।

बेहतर पोर्टल से इसे बदलना चाहिए

तिवारी ने दावा करते हुए कहा कि- “महा पोर्टल के प्रबंधन से जुड़े वे व्यक्ति और आईटी विशेषज्ञ अभी भी अपने पदों से हटने से हिचक रहे हैं। कई बार उनमें से कुछ को देर रात या अजीबो-गरीब स्थानों पर काम करते देखा गया, जो अजीब है।” मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए सुले ने कहा कि महा पोर्टल पर बेरोजगारों को होने वाली समस्याओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री को इसे रद्द करते हुए पिछली महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की प्रक्रियाओं पर डिजाइन किए गए बेहतर पोर्टल से बदलना चाहिए।

तुरंत सील किया जाना चाहिए

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री के सामने इसी तरह की मांग उठाई। उन्होंने सुले के साथ ही मुख्यमंत्री से मुलाकात की। तिवारी ने आग्रह किया कि बाहरी आईटी विशेषज्ञों की ओर से महा पोर्टल की एक पूर्ण जांच महाराष्ट्र में एक संभावित व्यापम की तरह के घोटाले को उजागर करने में मदद कर सकती है और इसलिए इसे तुरंत सील किया जाना चाहिए और इसमें आगे के कामकाज को रोक दिया जाना चाहिए।