नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन बिल ( cab ) को मंजूरी दे दी है। संसद भवन में हुई इस बैठक से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को गुरुवार को संसद में पेश किया जा सकता है।

बिल का विरोध करेगी कांग्रेस

कैबिनेट की ओर से नागरिकता संशोधन बिल को भले ही मंजूरी मिल गई है लेकिन संसद में इस बिल पर रार बढ़ सकती है। कांग्रेस नेता शशि थरूर का कहना है कि वह नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने जा रहे हैं, क्योंकि नागरिकों को धर्म के आधार पर बांटा नहीं जा सकता है।

मंसूबों को पूरा नहीं होने देंगे

कांग्रेस के अलावा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस बिल के विरोध में हैं। उन्‍होंने कहा कि इस बिल के जरिए मोदी सरकार लोगों को बांटने का काम करना चाहती है। हम मोदी सरकार को ऐसा नहीं करने देंगे।

इंडिया को इजरायल नहीं बनने देंगे

नागरिकता संशोधन बिल का राष्‍ट्रीय जनता दल ने भी विरोध किया है। पार्टी नेता मनोज झा ने कहा है कि इस मुल्क को इजरायल ना बनने दें। इसे गांधी का हिंदुस्तान ही रहने दें।

बता दें कि अब मोदी सरकार का पूरा फोकस नागरिकता संशोधन बिल ( CAB ) को पारित करवाने पर है। जानकारी के मुताबिक सरकार अगले हफ्ते लोकसभा में पेश कर सकती है। इसके पहले नागरिकता संशोधन बिल को आज कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने की संभावना है। सरकार अगले हफ्ते ये बिल संसद में पेश करने की तैयारी में है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों सहित कई दल इसका विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस केसाथ एनडीएस की सहयोगी पार्टी जेडीयू भी इसके विरोध में है।

CAB संविधान विरोधी बिल

मोदी सरकार भारत में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर यहां अवैध ढंग से रह रहे लोगों को भी नागरिकता देने की तैयारी कर रही है। बशर्ते वो मुसलमान न हों। बीजेपी को ये कानून बहुत जरूरी लग रहा है। आज गृह मंत्री अमित शाह इसे संसद में पेश कर सकते हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर के कई राज्यों में महीनों से इस बिल का विरोध जारी है। कांग्रेस इसे अंसवैधानिक बता रही है। उसके मुताबिक ये बिल भारत की बुनियादी कल्पना के खिलाफ है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों को नागरिकता दी जा सकेगी। हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को इस बिल का लाभ मिलेगा। मुसलमानों को इस दायरे में शामिल नहीं किया गया है।