नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू एवं कश्मीर में हिरासत में लिए गए राजनीतिक नेताओं को रिहा करने की कोई समय सीमा बताने से बुधवार को इनकार कर दिया। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा में कहा कि जानकारी मिली है कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने, पत्थरबाजी करने और सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए सीमापार से हवाला के जरिए अवैध धन भेजा जा रहा है।

उद्धव ने अचानक पीएम मोदी का तोड़ दिया सपना! सीएम बनते ही मोदी के सबसे बड़े प्रोजेक्ट को रोका और फिर…

उन्होंने कहा कि जांच में खुलासा हुआ है कि हुर्रियत का हिस्सा रहे कई संगठन और कार्यकर्ता घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अब तक टेरर फंडिंग मामले में 18 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने रिपोर्ट दी है कि कश्मीर घाटी में शांतिभंग, राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों जैसे आपराधिक कृत्यों पर रोक लगाने के लिए 4 अगस्त से पत्थरबाजों, सक्रिय कार्यकर्ताओं, अलगाववादियों और अन्य समेत कुल 5,161 लोगों को हिरासत में रखा गया है।

उन्होंने कहा कि इनमें से 609 लोगों को एहतियातन हिरासत में रखा गया है। चूंकि इन लोगों को संबंधित मजिस्ट्रेटों ने प्रत्येक मामले की संतोषजनक जांच के आधार पर वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत हिरासत में लिया है, तो सरकार के लिए इनकी रिहाई का कोई समय बता पाना संभव नहीं है।

बिग ब्रेकिंगः पंकजा मुंडे ने कर दिया बड़ा खुलासा.. इस बड़ी घोषणा से भाजपा में मची हलचल… अब होने लगी है…

इससे पहले बीते माह के अंत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जम्मू-कश्मीर मामलों के प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने एक इंटरव्यू में कहा, “पूर्व मुख्यमंत्रियों की रिहाई के बारे में कुछ भी तय नहीं किया गया है। प्रशासन उनके रिहा करने या नहीं करने या कब करने पर फैसला लेगा। उनमें से कुछ के खिलाफ अदालत में मामले हैं।”

इंटरनेट प्रतिबंध के बारे में उन्होंने कहा कि इससे सीधे तौर पर मीडियाकर्मियों को दिक्कत हो रही है और वह इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा, “हम कोशिश करेंगे और जल्द ही इंटरनेट को बहाल करेंगे, मैं इस मामले को उठाऊंगा।”