नई दिल्ली : मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम। 16 नवंबर 2013 का वह दिन। इस दिन यहां का जर्रा-जर्रा नम था। क्रिकेट प्रेमियों से लेकर यहां मौजूद सभी की आंखों से धारासार अविरल अश्रुधार बह रहे थे। यह दिन था क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का मैदान में आखिरी दिन। इस दिन वह अपना बल्ला टांगने जा रहे थे। आज इस घटना को छह साल बीत गए हैं। लेकिन इस दिन की याद से आज भी हर क्रिकेट लवर्स का रोम-रोम रोमांचित हो जाता है।
इस दिन के अलावा आज 24 अप्रैल भी सचिन के जीवन का खास दिन है। इसी दिन 1973 में उनका जन्म हुआ था। इसके बाद 16 साल की उम्र में 1989 में उनके पहले पाकिस्तान दौरे से लेकर 16 नवंबर 2013 तक विंडीज के बीच मैदान पर बिताए गए लम्हों के बीच अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को खुश होने के लिए उन्होंने अनेक वजहें दी है। इस दिन जब वह अपना विदाई भाषण दे रहे थे तो उनके साथ पूरा देश रो रहा था। उनके मन में शायद अब कभी सचिन की बल्लेबाजी और गेंदबाजी न देख पाने की कसक भी थी।
पढ़िए वह यादगार विदाई भाषण-

सचिन की वह यादगार स्पीच
बीते 24 साल से मेरा जीवन 22 गज के बीच गुजरा। यह यकीन करना कठिन कि उस शानदार सफर का अंतिम पड़ाव आ गया है। मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्‍होंने मेरे जीवन में कोई न कोई भूमिका अदा की है। मेरे हाथों में पहली बार लिस्‍ट है। बात करना मुश्‍किल हो रहा है, फिर भी मैं कोशिश करूंगा।

मेरी जिंदगी के सबसे अहम व्यक्ति मेरे पिता
मेरी जिंदगी में सबसे अहम इंसान मेरे पिता हैं। जिनकी कमी मैं 1999 से महसूस करता आ रहा हूं। उन्‍होंने मुझे तब से आजादी दी, जब मैं सिर्फ 11 साल का था। अपने सपनों का पीछा करो, पर शार्टकट कभी मत लेना। इतना ही नहीं, उन्‍होंने मुझे एक बेहतर इंसान बनने की नसीहत भी दी, जिसे मैंने अपनाया। जब भी मैंने बल्‍ला उठाया वह उनके लिए था।

मां ने मैदान पर जाने की शक्ति दी
मेरी मां! मुझे नहीं मालूम इतने शैतान बच्‍चे से वह कैसे पार पाती थीं। उनके अंदर ढेर सारा संयम होगा। पिछले 24 साल जब मैं भारत के लिए खेला, उन्‍होंने मेरा ख्‍याल रखा। इस से कहीं पहले वह मेरे लिए प्रार्थना करती आई हैं। प्रार्थना और सिर्फ प्रार्थना। मुझे मैदान पर जाने और प्रदर्शन करने की शक्‍ति दी है।

मेरी बल्लेबाजी के दौरान बहन रखती थी उपवास
मेरे अंकल और आंटी ने मुझे बेटे की तरह पाला है। चार साल तक उनके साथ रहा। मैं उनके बेटे की तरह हूं और मुझे खुशी है कि यह ऐसे ही चला आ रहा है।
मेरे बड़े भाई ज्‍यादा बात नहीं करते, पर एक बात जो उन्‍होंने हमेशा कही है कि उन्‍हें मालूम है कि मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगा।
मेरी बहन सविता ने मुझे मेरा पहला बल्‍ला-कश्‍मीरी विलो दिया था। वह उनमें से एक हैं, जब मैं बल्‍लेबाजी कर रहा होता हूं तो उपवास रखती हैं।
अजित मैं आपके लिए क्‍या कह सकता हूं। आपने मेरे लिए अपना करियर कुर्बान कर दिया. आपने मेरे भीतर प्रतिभा की झलक देखी और मुझे मेरे कोच आचरकेर के पास ले गए। बीती रात को भी उन्‍होंने मुझे फोन किया और हम दोनों मेरे आउट होने के बारे में चर्चा कर रहे थे, यह जानते हुए कि इस बात की थोड़ी-सी भी गुंजाइश नहीं है कि शायद फिर बैटिंग करने को मिले। आदत जो शायद जन्‍म से है। अब जब मैं क्रिकेट नहीं खेलूंगा, हम शायद टेक्‍निक के बारे में बात करें। अगर वह चर्चाएं नहीं रहीं होती तो शायद मैं कम बेहतर क्रिकेटर बन पाता।

1990 में आया मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत लम्हा
1990 में मेरे जीवन में सबसे खूबसूरत लम्‍हा आया, जब मेरी अपनी पत्‍नी अंजलि से मुलाकात हुई। जब हमने घर बसाने का फैसला किया, तो उसने कहा वह उसका ख्‍याल रखेगी। तुम क्रिकेट खेलो। मेरा साथ निभाने और मेरी बकवास सुनने के लिए शुक्रिया। तुम मेरी जिंदगी की सबसे बढ़िया पार्टनरशिप हो, जो मैंने की है।

अब सारा वक्त तुम्हारे लिए है सारा और अर्जुन
सारा और अर्जुन मेरी जिंदगी के दो अनमोल नगीने हैं। वह बड़े हो गए हैं। मेरी बेटी 16 साल की है, मेरा बेटा 14 साल का है। वक्‍त पंख लगाकर उड़ गया। मैंने हमेशा विशेष अवसरों जन्‍मदिन, खेल दिवसों, छुट्टियों के वक्‍त उनके साथ समय बिताना चाहा। उन सब चीजों को मैंने मिस किया है। तुम्‍हारी समझदारी के लिए शुक्रिया। मैं वादा करता हूं अगले 16 साल या उसके बाद जो भी आएंगे तुम्‍हारे लिए हैं।

सास-ससुर का भी किया शुक्रिया अदा
आपके लिए एक मजबूत परिवार का होना और उसका राह दिखाते रहना बेहद महत्‍वपूर्ण है. अंजलि से शादी की इजाजत देने के लिए मेरे सास-ससुर का शुक्रिया।
मेरे पुराने दोस्‍त सब छोड़-छाड़कर नेट पर मुझे गेंद फेंकने आते रहे हैं। जब मुझे चोट लगी थी और लग रहा था कि मेरा करियर खत्‍म होने वाला है, वह सुबह 3 बजे भी मेरा फोन उठाते. मेरे पास होने के लिए शुक्रिया।

कोच अचरेकर से मिलना जीवन का अनमोल लम्हा
मेरे जीवन में मील का पत्‍थर तब आया, जब मेरा भाई मुझे कोच के पास ले गए, आचरेकर। उन्‍हें स्‍टैंड में देखकर मैं खुशी से भर उठा था। आमतौर पर वह सारे मैच टेलीविजन पर ही देखते हैं।
सर मुझे पूरी मुंबई घुमाते और सुनिश्‍चित करते कि मैं मैच प्रैक्‍टिस कर सकूं। सर ने कभी मुझसे मजाक में भी नहीं कहा वेल प्‍लेड, क्‍योंकि उन्‍हें लगता था कि मैं आत्‍मसंतुष्‍ट हो जाऊंगा और मेहनत नहीं करूंगा। अब शायद वह मेरे करियर के लिए वेल प्‍लेड कह सकते हैं।

बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट और चयनकर्ताओं का आभार
मुझे न्‍यूजीलैंड से सुबह 4 बजे लौटने और फिर 9 बजे मैच के लिए हाजिर होना याद है, इसलिए नहीं कि किसी ने मुझसे वहां रहने के लिए कहा, बल्‍कि मैं वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता था। मुंबई क्रिकेट का शुक्रिया।
मुझ में भरोसा जताने के लिए सभी चयनकर्ताओं और यहां अपनी बात रखने की आजादी देने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया। मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रगुजार हूं, खासकर उस समय जब मैं चोटिल था। कई सीनियर्स ने मुझे क्रिकेट खेलने और सही तरीके से खेलने के लिए प्रेरित किया। मैं उनके साथ नहीं खेल सका, लेकिन मेरे दिल में उनके और उनके खेल के लिए सम्‍मान है।

टीम मेट्स को याद करना भी नहीं भूले
राहुल, लक्ष्‍मण, सौरव अनिल आज यहां नहीं हैं। मेरी टीम। आप सब घर से दूर मेरा परिवार हैं। ड्रेसिंग रूम से दूर होना और उन लम्‍हों को न जी पाना बेहद मुश्‍किल होने जा रहा है। मुझे लगता है कि हम सब इंडियन क्रिकेट टीम का हिस्‍सा होकर देश की सेवा कर पाने के लिए भाग्‍यशाली और गर्व महसूस करते हैं। मुझे मालूम है कि आप सब सही भावना और सही मूल्‍यों के साथ देश की सेवा करना जारी रखेंगे। मेरा विश्‍वास है कि हम भाग्‍यशाली हैं कि खेल का खयाल रखने के लिए ऊपर वाले ने हम सबको चुना है। हर पीढ़ी के पास खेल का खयाल रखने का मौका आता है। मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप सही भावना के साथ देश और खेल की सेवा करना जारी रखेंगे।

मास्करहेंस को भी किया याद
मुझे सेहतमंद रखने के लिए सभी डॉक्‍टरों का शुक्रिया। मेरे प्‍यारे दोस्‍त, स्‍व. मार्क मास्‍करहेंस, मेरे पहले मैनेजर। वह क्रिकेट, मेरे क्रिकेट, खासकर भारतीय क्रिकेट के शुभेच्छु थे। वह समझते थे कि देश का प्रतिनिधित्‍व करना क्‍या होता है। उन्‍होंने कभी मुझ पर वह करने का दबाव नहीं डाला, जो स्‍पांसर्स मुझसे कराना चाहते थे। आज, मैं उन्‍हें मिस कर रहा हूं। शुक्रिया मार्क।
मेरी वर्तमान मैनेजमेंट टीम डब्लूएसजी ने मेरी जरूरतों को समझा और वहां से आगे बढ़े जहां मार्क ने छोड़ा था। शुक्रिया डब्‍ल्‍यूएसजी। उनके मैनेजर विनोद के लिए भी एक बड़ा शुक्रिया। साथ ही मीडिया के लिए भी जिसने हमेशा मेरा साथ दिया। इसका मेरे ऊपर बेहद सकारात्‍मक असर पड़ा है।

सचिन सचिन की आवाज मेरी कानों में गूंजती रहेगी
मुझे लगता है कि मेरा भाषण कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया। मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। आपका सपोर्ट मेरे दिल के करीब और मेरे लिए बेशकीमती है। मैं इतने सारे लोगों से मिला हूं, जिन्‍होंने मेरे लिए उपवास रखा, मेरे लिए प्रार्थना की. इस सबके बिना मेरी जिंदगी आज वह नहीं होती जो है। वक्‍त पंख लगाकर उड़ जाता है, लेकिन आप लोगों ने मेरे लिए जो यादें छोड़ी हैं, वह हमेशा मेरे साथ रहेंगी। विशेषकर सचिन सचिन की वह आवाज जो आखिरी सांस तक मेरे कानों में गूंजती रहेगी।
शुक्रिया! अगर मुझसे कुछ छूट गया है तो मेरा मानना है कि आप समझ सकेंगे। गुडबाय।