Ranchi: झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में 31 प्रस्ताव पारित किया गया है. कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए मेसर्स रामसुतार नोएडा को मनोनयन पर चयनित किया गया. 25 लाख की लागत से वहां प्रतिमा स्थापित होगी. एकत्रित पंचायत निगम लिमिटेड के 26 कर्मियों को बकाया भुगतान किया जाएगा. 2006 से 15. 11 2011 तक राशि का भुगतान किया जाएगा. इसमें 38 लाख खर्च होगा.
झारखंड राज्य में आंधी-तूफान और लू को राज्य की विशिष्ट स्थानीय आपदा घोषित किया गया है. इन आपदाओं से जान गंवाने वाले के आश्रितों को गृह मंत्रालय भारत सरकार के मापदंड के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी तथा दुधारू पशुओं/ गैर दुधारू पशुओं अथवा ढुलाई के लिए उपयोग की जाने वाले पशुओं की भारपाई के लिए सहायता राशि दी जाएगी.
पीटीजीएस और एससी एसटी 13 आवासीय विद्यालय एनजीओ से संचालित करने के लिए अवधि विस्तार दिया गया. सभी पीडीएस वितरण प्रणाली दुकानों में ई पास के जरिए खाद्यान्न वितरण के लिए नियमों की शिथिल किया गया है. दो एजेंसी अवधि विस्तार दिया. मेडिकल कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद 3 वर्ष की सेवा देने के नियम में संशोधन किया गया है. अब मेडिकल कॉलेज में तीन वर्ष की सेवा कोई मेडिकल छात्र नहीं देना चाहते हैं, तो 30 लाख रुपये तथा छात्रवृति एवं अन्य भत्ते के रूप में प्राप्त सभी राशि एकमुश्त वापस किये जाने के प्रावधान को संशोधित किया गया है.
अब पीजी उत्तीर्ण होने के बाद राज्य सरकार में एक वर्ष की सेवा देने के बाद यदि कोई छात्र-छात्रा राज्य सरकार को सेवा नहीं देना चाहते हैं तो उन्हें तीन वर्षों में से सेवायोग्य बचे हुए महीना की संख्या x 125000 का भुगतान करना होगा. इसमें छात्रवृति के रूप में भुगतेय राशि भी शामिल है.
उदाहरण के लिए यदि कोई स्टूडेंट 20 महीने की सेवा राज्य को दे चुके हैं और अब सेवा देना नहीं चाहते हैं, तो उन्हें बचे हुए 16 माह के लिए उन्हें 16×125000 रुपये का भुगतान बॉन्ड राशि के रूप में करना होगा.
पीजी के बाद बॉन्ड पोस्टिंग की अवधि में कोई स्टूडेंट्स सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर जाना चाहता है तो वैसी स्थिति में बाहर में पढ़ाई पूरा करने के बाद बची हुई अवधि के लिए राज्य सरकार के अधीन काम करना होगा. झारखंड के मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी का पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होने के बाद राज्य में दो वर्षों का सेवा देना अनिवार्य किया गया है. यदि इसमें भी एक वर्ष के बाद कोई स्टूडेंट अपनी सेवा नहीं देना चाहते हैं तो उसे बचे हुए हर महीने का डेढ़ लाख रुपये देय होगा.
सिकनी कोलियरी में 137 एकड़ खनिज पट्टा को विस्तार. आपदा में अब ग्रीष्म लहर यानी लू को भी शामिल किया गया.
मंत्रिपरिषद ने झारखंड राज्य के पुलिस, कक्षपाल, सिपाही (होमगार्ड), उत्पाद सिपाही के नियुक्ति नियमावलि 2025 का गठन किया गया है. प्रस्तावित नियमावलि में
उत्पाद सिपाही के शैक्षणिक योग्यता दसवीं/ मैट्रिक रखी गयी है
शारीरिक माप में EWS / पिछड़ा/ अतिपिछड़ा के लिए न्यूनतम ऊंचाई 160 सेमी, सीना- 81 सेमी
एसटी/एससी वर्ग के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेमी, सीना- 79 सेमी
महिलाओं के लिए न्यूनतम ऊंचाई 148 सेमी
शारीरिक दक्षता परीक्षा
पुरुषों के लिए 1600 मीटर की दौड़ 6 मिनट में पूरा करना होगा, जो पहले 10 किलोमीटर था.
महिलाओं के लिए 1600 मीटर की दौड़ 10 मिनट में पूरा करना होगा.
पावर सेक्टर को भेजे जाने वाले कोयला पर रॉयल्टी के नियम में सुधार
झारखण्ड राज्य के अन्तर्गत कम्पनियों द्वारा Power/Regulated Sector को प्रेषित किये जाने वाले कोयला खनिज पर स्वामिस्व (रॉयल्टी) की वसूली, Other than Power/Regulated Sector को नीलामी के माध्यम से विक्रय किये जाने वाले कोयला के Invoices के आधार पर खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा नियमों में संसोशधन किया गया है.
सरकार के मानना है कि राज्य के खनिज राजस्व का मुख्य स्रोत कोयले से प्राप्त होने वाला राजस्व है तथा सरकारी कम्पनियों द्वारा बहुतायत (लगभग 85%) कोयले का प्रेषण Power/Regulated Sector के उद्योगों में किया जाता है. Power/Regulated Sector को प्रेषित किये जाने वाले कोयले का बिक्रय मूल्य कोल इण्डिया लि० द्वारा निर्धारित किया जाता है. कोयले के समान ग्रेड, जो Power/Regulated Sector के उद्योगों के लिए किया जाता है, का प्रेषण खुले बाजार में नीलामी के माध्यम से कोल इण्डिया लि० एव अनुषंगी कम्पनियों द्वारा किये जाने पर विक्रय मूल्य कोल इण्डिया लि० द्वारा साधारणतया निर्धारित मूल्य से अधिक प्राप्त होता है.
प्रावधानों के आलोक में कोयला खनिज के विक्रय मूल्य का 14% रॉयल्टी मद में राज्य सरकार को प्राप्त होता है. उपलब्ध ऑकड़ो से स्पष्ट है कि खुले बाजार में नीलामी के माध्यम से कोयला की बिक्री नहीं किये जाने की स्थिति में लगभग 85% कोयला, जो Power/Regulated Sector को प्रेषित किया जाता है. उसके उपर स्वामिस्व (रॉयल्टी) की वसूली की यथोचित प्राप्ति नहीं होती है एवं स्वामिस्व / रॉयल्टी की वसूली हेतु अपनायी जाने वाली प्रक्रिया में आवश्यक सुधार किया जाना उचित प्रतित होता है.
ये सुधार किये गए
“झारखण्ड राज्य के अन्तर्गत कम्पनियों द्वारा Power/Regulated Sector को प्रेषित कोयला खनिज पर स्वामिस्व (रॉयल्टी) की वसूली, Other than Power/Regulated Sector को नीलामी के माध्यम से विक्रय किये जाने वाले कोयला के Invoices के आधार पर परिशिष्ट-1 के अनुसार खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा की जाएगी.”
निर्धारित मूल्य के आधार पर ही कम्पनियों द्वारा Power/Regulated Sector को प्रेषित किये जाने वाले कोयला खनिज पर श्रेणीवार स्वामिस्व (रॉयल्टी) की वसूली की जाएगी.
आंगनबाड़ी सेविका/ सहायिका के नियमावली में संशोधन
झारखण्ड आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका चयन एवं मानदेय (अन्य शत्तों सहित) नियमावली, 2022 (यथासंशोधित) में संशोधन की स्वीकृति दी गयी है. वर्तमान में प्रावधान है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में सेविका / सहायिका, प्रश्नगत केन्द्र के लाभान्वितों के उसी वर्ग से होनी चाहिए जिसका उस आंगनबाड़ी केन्द्र के लाभान्वितों में बाहुल्य हो. साथ ही, आंगनबाड़ी केन्द्र के लाभान्वितों के बाहुल्य वाले वर्ग में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में उनका चयन इस तरह से किया जाएग.
वर्तमान में प्रावधान है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में सेविका / सहायिका, प्रश्नगत केन्द्र के लाभान्वितों के उसी वर्ग से होनी चाहिए जिसका उस आंगनबाड़ी केन्द्र के लाभान्वितों में बाहुल्य हो. साथ ही, आंगनबाड़ी केन्द्र के लाभान्वितों के बाहुल्य वाले वर्ग में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में उनका चयन आदिम जनजाति बाहुल्य क्षत्रों में आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका के लिए पोषक क्षेत्र में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाली आवेदिका की अनुपलब्धता की स्थिति में केन्द्र के दो (02) किलोमीटर के परीधि में आवासित महिला का चयन नियम-3 (6) में निर्धारित अग्रता से किया जाएगा.