सदर अस्पताल के डॉ अजीत के परिजन भी कॉरपोरेट हॉस्पिटल में बने ठगी के शिकार

Ranchi : सदर अस्पताल, रांची के डॉक्टर (सर्जन) अजीत के परिजन भी कॉरपोरेट अस्पताल में ठगी के शिकार हुए. अजीत के पिता के इलाज के नाम पर 15 घंटे के आसपास में ही पचास हजार से ऊपर का बिल बना दिया गया. एक ईलाज (ऑपरेशन) के क्रम में जब मंगलवार को अजीत व्यस्त थे, उसी दौरान उनके पिताजी की तबीयत थोड़ी खराब हुई तो उनके परिजन परिस्थितियों को देखते नजदीक के अस्पताल रामप्यारी सुपर स्पेशलिटी, हरिहर सिंह रोड, रांची में लेकर गए. वहां उनका इलाज डॉक्टर राजीव रंजन के अंदर शुरू हुआ.

वहां इमरजेंसी में बताया गया कि उनके पास CAPF कार्ड है तो TPA वाले ने बोला कि आपका सरकारी (CGHS ) दर पर यहां इलाज होगा. दो बोतल पानी चढ़ाने के बाद अजीत के पिता होश में आ गए. तब तक डॉक्टर अजीत भी वहां पहुंच गए उन्होंने बोला कि इनका मेदांता में इलाज कैशलेस हो जाएगा परंतु डॉक्टर के समझाने पर हम लोगों ने वहीं ICU में छोड़ दिया. अगले दिन जब सुबह में बिल के बारे में पूछा गया तो बोला गया कि दोपहर में बताया जाएगा. जब दोपहर में पूछा गया तो बताया गया कि आपका 47000/ बिल हो गया है. इसमें अभी और जुटेगा.

बुधवार की सुबह जब डॉक्टर अजीत पिताजी को देखने गए तो उनका बीपी ठीक था. ऐसे में उन्होंने अनुरोध किया कि उनको छुट्टी दे दी जाए. इसके बाद अस्पताल से उन्हें छोड़ दिया गया. हालांकि इलाज के दौरान चौबीस घंटे से भी कम समय में केवल 30 हजार रुपए से अधिक का एंटीबायोटिक दिये जाने और अनुचित इलाज किये जाने के तरीकों को लेकर हर ओर सवाल शुरू हो गया है.

इधर, इस मामले में आइएमए, झारखंड चैप्टर के डॉ प्रदीप सिंह ने ऐसे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. सरकार से जांच कराने और दोषियों को सजा देने की मांग की. साथ ही क्लिनिकल इस्टेबलिसमेंट एक्ट में सुधार की वकालत करते कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल के रवैये पर लगाम जरूरी है. 5-10 बेड के छोटे अस्पतालों के भी संचालन की व्यवस्था हो. इससे योग्य डॉक्टर भी अपनी क्षमता के अनुसार अस्पताल संचालित कर सकेंगे.

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